mai kya hu, kya mahsoos karta hu. jo mahsoos karta hu.vo kya mahsoos karta hu. kabhi sochta hu
jo mahsoos karta hu or jinke liye vo mahsoos karta hu vo to mere hi paas h.
aaj hum jaha h jaise h... kahi bhi h,vo mahsoos karta hu. mai kya kaha hu.me ye mahsoos karta hu.
Wednesday, December 2, 2009
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Mahsoos
ReplyDeleteऔरत एक लचीली डाली की तरह होती है जो बसंत की सुबह के शीतल झोंके के साथ झूला झूल सकती है किन्तु तेज़ तूफ़ान के झोंकों से वो नहीं टूट सकती. औरत किसी की संपत्ति नहीं बन सकती, वो तो करोड़ों-अरबों वर्षों से बहते आ रहे निर्मल-जल का एक ऐसा चश्मा है जिसे कभी न सूखने का ईश्वेर से वरदान मिला हुआ है.औरतों की अच्छी आदतें पुरुषों के बदतरीन ऐब हैं. जब वो इतराती है तो उसपर कोई काबू नहीं पा सकता. जब कंजूसी करने पर आती है तो पति का धन बचा लेती है. जब डरती है तो काक्रोच भी उससे छेड़-छाड़ करने लग जाते है. औरत सूरज की गर्मी, चंद्रमा की ठंडक और फूलों की खुशबू कों कहते है. मर्द की ज़िन्दगी के हसीन सपने कों औरत कहते हैं, झूले से लेकर शमशान तक की यात्रा करने वाली मासूमियत का नाम औरत है जो हमारे आर्थिक और सामाजिक तंत्र का सञ्चालन करती है, किन्तु हम यही समझते हैं की वो पुरुष-प्रधान समाज में पुरुषों के आधीन रहती है.हमारे समाज में इसके बावजूद समाज के दुखों, प्रताडनाओं, भ्रमों, आँसुवों, सिसकियों और अपमानित होते रहने वाली प्रकृति के देह-पिंड के रूप में अवतरित जीव का नाम औरत है.वो है तो हम हैं, वो नहीं होगी तो हम भी नहीं होंगे, शाएद यही बात हम नहीं जानते.
ReplyDeleteगिलहरी का ममत्व
ReplyDeleteकेले के पेंड़ में फूल खिला और कुछ दिनों में उसमें फल भी लगे. गिलहरी ने एक-एक रेशा जोड़्कर अपना घोंसला बनाया.ज्यों-ज्यों केले के फल बढ़्ते गए घोंसला सिकुड़्ता गया. गिलहरी ने उसमें बच्चे दिए. बंदरों ने केले के पेड़ को तोड़ दिया. केले के घर के साथ ही गिलहरी का घोंसला बच्चों सहित जमीन पर आ गिरा' माली ने केले के घर से घोंसला बाहर कर दिया . गिलहरी अपने बच्चे को एक-एक कर सुरक्षित स्थान पर ले गई. इसी को कहते हैं मां का ममत्व.-शमशेर अहमद खान
achha mobile hi kaha liya..
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